इठलाता, गहराता खूबसूरत प्रेम इठलाता, गहराता खूबसूरत प्रेम
पहचान का संकट पहचान का संकट
हे मानस के राजहंस तू चल उस देश जहाँ। हे मानस के राजहंस तू चल उस देश जहाँ।
तब भी अपने व्यवहार में नम्रता बनाए रखिए। तब भी अपने व्यवहार में नम्रता बनाए रखिए।
कल भी सूरज उगेगा नया सवेरा होगा, कल भी सूरज उगेगा नया सवेरा होगा,
सब कुछ तेरे लिए ही त्याग किया है, पर तेरी बेरूखी सहन नहीं कर पाऊंगा ! सब कुछ तेरे लिए ही त्याग किया है, पर तेरी बेरूखी सहन नहीं कर पाऊंगा !